स्वयं सहायता समूह–बैंक लिंकेज कार्यक्रम (SHG-BLP)
SHG–बैंक लिंकेज मॉडल भारतीय सूक्ष्म वित्त (Micro Finance) व्यवस्था में एक प्रमुख मॉडल बना हुआ है। पिछले कई वर्षों में यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अब तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित गरीब परिवारों के वित्तीय समावेशन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
SHG-BLP के लिए पात्रता मानदंड
किसी स्वयं सहायता समूह (SHG) को बैंक से लिंकेज के लिए पात्र होने हेतु निम्नलिखित मूल विशेषताएँ होनी चाहिए:-
SHG का अस्तित्व कम से कम पिछले छह माह से सक्रिय रूप में होना चाहिए, जैसा कि SHG की लेखा पुस्तकों में दर्शाया गया हो, न कि केवल बचत खाता खोलने की तिथि से।
SHG को ‘पंचसूत्र’ का पालन करना चाहिए, जैसे—नियमित बैठकें, नियमित बचत, नियमित आंतरिक ऋण, समय पर ऋण चुकौती तथा अद्यतन लेखा-जोखा।
SHG की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक होनी चाहिए, जिसमें सभी सदस्यों की समान भागीदारी स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
SHG को उचित लेखा-जोखा एवं अभिलेख संधारण की आदत होनी चाहिए।
SHG केवल ऋण लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से गठित न हो, बल्कि सदस्यों के पारस्परिक सहयोग एवं सामूहिक हित के लिए कार्यरत हो।
SHG के सभी सदस्य यथासंभव समान सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि तथा रुचि के हों।
SHG को नाबार्ड द्वारा निर्धारित ग्रेडिंग मानकों में पात्र होना चाहिए।
पूर्व में निष्क्रिय (Defunct) रहे SHG भी पात्र होंगे, यदि उन्हें पुनर्जीवित कर न्यूनतम 3 माह तक सक्रिय रखा गया हो।
SHG-BLP से बैंक एवं SHG सदस्यों को लाभ
प्रभावी ग्रामीण ऋण वितरण प्रणाली का विकास।
समूह गतिशीलता एवं पारस्परिक दबाव के कारण उत्कृष्ट ऋण वसूली।
ऋण का बेहतर एवं सही उपयोग सुनिश्चित होना।
नाबार्ड से कम दर पर 100% पुनर्वित्त (Refinance) उपलब्ध होने से लाभकारी योजना।
सरल ऋण प्रक्रिया एवं न्यूनतम दस्तावेज़ीकरण।
ग्रामीण गरीबों की बचत का संग्रह।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक की छवि सुदृढ़ होना।
सबसे महत्वपूर्ण, ग्रामीण गरीबों का बैंक पर विश्वास बढ़ना।
ऋण / सीमा का उद्देश्य
RBI परिपत्र सं. RPCD.FID.BC.No.06/12.01.001/2011-12 दिनांक 1 जुलाई 2011 के अनुसार, बैंकों से अपेक्षा की जाती है कि वे SHG सदस्यों की संपूर्ण ऋण आवश्यकताओं को पूरा करें, जैसे—(क) आय सृजन गतिविधियाँ,(ख) सामाजिक आवश्यकताएँ जैसे आवास, शिक्षा, विवाह आदि,(ग) ऋण अदला-बदली (Debt Swapping) आदि।
ऋण / सीमा की राशि
नाबार्ड के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, SHG को बैंक द्वारा 1:1 से 1:4 के बचत-ऋण अनुपात में बचत आधारित ऋण स्वीकृत किया जा सकता है। परिपक्व (Matured) SHG के मामलों में, बैंक के विवेकानुसार बचत की चार गुना सीमा से अधिक ऋण भी दिया जा सकता है।